Rishabh tomar

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लेखनी कहानी -01-Dec-2022

किसी के कंगनों में खनखन नही है
बस मेरी जिंदगी में सुलझन नही है

तुमको भृम हुआ है बरसात देख के
पतझड़ है गर्मी है यार सावन नही है

भला कैसे लिखूँ चाहत की व्यथा में
कही राधा नही है कही मोहन नही है

इश्क़ हो तो वो मुकमल होना चाहिये
वरना बाद इसके बचे जीवन नही है

भला किसको मिला है प्यार उसका
किसी को तन मिला तो मन नही है
किसी को मन मिला तो तन नही है

मासूमियत के संग चालाकी जरूरी है
ज्यो बिना विष के मिले चंदन नही है

पहनकर के खुश न हो नादान लड़की
ये सोने की हथकड़ी है कंगन नही है

जिश्म की चमचम ने बिगाड़ा खेल है
इश्क़ से बढ़कर कोई उलझन नही है

जोड़ते हो व्यर्थ ही कागज के टुकड़े
ऋषभ अपनों से बढ़कर धन नही है

ऋषभ तोमर

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8 Comments

Gunjan Kamal

05-Dec-2022 07:34 PM

बहुत खूब

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Rishabh tomar

16-Dec-2022 09:54 AM

धन्यवाद आदरणीय

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Sangeeta( chahat) kushwah

01-Dec-2022 11:28 PM

बहुत बढ़िया ऋषभ

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Rishabh tomar

02-Dec-2022 10:32 AM

धन्यवाद दीदी

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बहुत खूब

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Rishabh tomar

02-Dec-2022 10:32 AM

धन्यवाद आदरणीय

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